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Thursday, May 26, 2016

प्रतिभाशाली

"प्रतिभाशाली लोक पोस नै मानै छै" ई बात बहुत बेरसँ एकटा बूढ़ साहित्यकार युवा साहित्यकारक पक्षमे बाजि रहल छलाह. ओ फेर तर्क देलाह जे सुच्चा रचनाकर्मी स्वतंत्र होइत छै ओकरा केकरो गुलामी नै करबाक चाही. सभामे सभ हुनकर तर्कसँ हारि गेल छल.
बूढ़ साहित्यकार घर एला तँ किछु सुनसान लगलनि. बूढ़ीकेँ सोर पाड़लनि. बूढ़ीकेँ एबासँ पहिनेहे एकटा बेटा आबि कहलकनि "आब हम भिन्न होबए" चाहैत छी. बूढ़ साहित्यकार बिना किछु बजने अंगनासँ निकलि गेलथि.

Sunday, July 14, 2013

खाए बला पार्टी








आइ साँझमे बड्ड दिनक पछाति भोजन बनेबाक अवसर भेटल। पिता श्री आ माँझिल भाएकेँ पुछलिअन्हि जे की खेबै ?
अरे भाइ तों जे आगूमे देबही से खा लेबै। हम सभ तँ खाए बला पार्टी छी ...

आ ओही रातिमे हम सपना देखलहुँ जे हमर पिता श्री आ माँझिल भाए नेता बनि क' मंचपर छथि आ राजनीतिक पार्टी बनेबाक घोषणा क' रहल छथि।

Wednesday, May 22, 2013

भविष्य


वाह... ई बच्चे सभ तँ भविष्य होइत अछि।
वाह.......................
अच्छा ई कहू जे अहाँके ए.बी.सी अबैए..?
हँ....
वाह उत्तम।
अपन देशक चौहद्दी अबैए ?
हँ......
वाह.. खूब नीक.
बाबा-परबाबाके नाम मोन अछि ?
हँ...
वाह---वाह की संस्कार अछि।
अच्छा ई कहू जे अहाँके कि नै अबैए ?
जी हमरा बस लाज नै अबैए ----





Friday, June 29, 2012

पत्नीभक्त

भोज खएबाक लेल बैसल छलहुँ। पात पर भात, दालि आ दू प्रकारक तीमन आबि गेल छल। बारिक सभ मनोयोग सँ परसि रहल छलाह । एही क्रम मे एक गोट बारिक बजलाह--

" एखन धरि फेकू बाबू नहि पहुँचलाह आछि"।
गप्प सुनतहि रमेश बाबू फरिझौलखिन्ह--
"औताह कोना पत्नी-भक्त छथि ने।घरवालीक पएर जतैत हेताह"।
सुधीर फेकू बाबूक समांग छलखिन्ह, तुरछि कए बजलाह---
पत्नी-भक्त भेनाइ खराप छैक की ?
जबाब दैत रमेश कहलखिन्ह तखन बैसल छी किएक जाउ अहूँ।
एहि बेर सुधीर गप्प के थोड़ेक मोड़ दैत बजलाह-
" त की अहाँक सिद्धान्तक मोताबिक पुरुष पत्नी-भक्त नहि भए वेश्या-भक्त बनि जाए"

Thursday, June 28, 2012

नर्क

प्रस्तुत अछि हमर लिखल 62म विहनि कथा जकर शीर्षक छै " नर्क "।


" हे रौ, खा ले पूरा। ऐंठ ने छोड़ "
" ऊँ...ऊँह......नै आब नै खाएल हेतौ हमरासँ। पेट भरि गेलै "
" हे देखही उपरसँ भगवान देखै छथन्हि जे लोक जतेक बेर ऐंठ फेकै छै तकरा नर्कमे जाए पड़ैत छै आ ओहिठाँ ओकरा ओतेक दिन भूखल रहए पड़ैत छै "
" नै हमरा भूख नै छौ "
आ माए ओही छीपीमे अपनो हिस्सा लए खाए लागैए। बच्चा जवान भेलै, हिस्सक वएह मुदा बहन्ना दोसर------
" छोड़ भगवान-तगवानकेँ। ओ कोनो देखै छै। सभ झुट्ठे छै "
आ पिज्जा भरल पेटसँ आधे थारी खा उठि जाइत अछि। कालक्रमे जबान बूढ़ भेल। बेट-पुतहु बाहरे। खाली अपने आ बुढ़िया घरपर। जहिया बुढ़िया बेमार पड़ै तहिया उपासे सन लागै। ओना कहिओ काल देआद सभ सेवा कए दए मुदा ओहो सभ तेरहे -बाइस।
आ उपसे सन एकटा साँझमे बूढ़ाकेँ पड़ोसिया घरसँ सुनाइ पड़लन्हि--- " हे देखही उपरसँ भगवान देखै छथन्हि जे लोक जतेक बेर ऐंठ फेकै छै तकरा नर्कमे जाए पड़ैत छै आ ओहिठाँ ओकरा ओतेक दिन भूखल रहए पड़ैत छै "
आ की ई सुनिते बुढ़बाक रोंआ ठाढ़ भए गेलै। मोन पड़ि गेलै ओकरा अपन माएक गप्प। ठीक इएह तँ कहै छलै। आ सिहरैत-सिहरैत बूढ़ा अपन वर्तमानमे आबि गेलाह आ हिसाब लगाबए लगलाह जे ओ कते दिन कतेक बेर ऐंठ छोड़ने छथि।

Friday, April 6, 2012

निशान




हाथ मे माइक, गरा मे फूलक माला, आँखि मे तेज, वाणी मे जोश। नेता जी मंच
पर ठाढ़ भए कए धूआँधार भाषण दए रहल छलाह----

खाली एक बेर हमरा जितएबाक कष्ट करु, हम समस्त जनताक कष्ट के अपन कष्ट
बूझब । भ्रष्टाचार के मेटा देबैक। गुंडा-लफंगाक नामो-निशान खत्म कए
देबैक-------

एहि अंतिम आश्वासन के खत्म होइतहिं श्रोता मे सँ केओ चिचिआ उठल-------


नेता जी जखन अहाँ गुंडा-लफंगाक नामो-निशान मेटा देबैक त अहाँक निशान कतए रहत।


आ नेता जी गप्प के जानि-बूझि अनठा कए ममच सँ उतरि विदा भए गेलाह।

Wednesday, April 4, 2012

अंतर

किछु बर्खक पछाति मैरिज सेरेमनीक शुभ अर्धनिशाभाग रातिमे बर अपन कनियाँसँ पुछलखिन्ह----- कहू तँ हमर सासुर आ अहाँक सासुरमे की अंतर भेटल ?

कनियाँ औंघाएल मुदा चोटाएल स्वरे कहलखिन्ह------"इएह जे अहाँ अपन सासुरमे मालिक रहैत छी आ हम अपन सासुरमे बहिकिरनी"

लक्ष्मी

परिछन-----------भगवती गीत---------हास-परिहासक गीत। बच्चा सभ अनेरो औना रहल छल। दरवज्जा पर धमगज्जर मचल। तुमुल हास-ध्वनि। नाना प्रकारक गप्प-सरक्का। बरक बाप कन्याक बापसँ कहलथिन्ह----" आह बूझि लिअ समधि जे हमरा घरमे लक्ष्मी देलहुँ अहाँ----। कन्याक बाप कहलखिन्ह " हँ से तँ ठीके" आ कहिते आँखि झुकि गेलन्हि आ मोने-मोन बजलथि--" एखन तँ लाखक-लाख टका संगमे अनलीहए ने लक्ष्मी तँ बुझेबे करतीह। जखन खत्म भए जाएत तखन इएह लक्ष्मी कुलच्छनी बनि जाएत।"------